मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

मिठाई............

प्रेम एक मीठा रस है, मिठाई ki तरह,

परन्तु आसानी से नहीं मिलता, क्युकी प्यार सबसे कीमती है

जैसे-जैसे प्रेम बड़ेंगा, वैसे-वैसे तड़प बढेंगी,

जैसे-जैसे तड़प बढेंगी, वैसे-वैसे पुकार बढेंगी,

जैसे-जैसे पुकार बढेंगी वैसे-वैसे कदम भी बढेंगे, जितनी जोर से प्यास लगती है

उतने ही जोर से कदम बढने लगते है जल के स्त्रोत की ओर


और जब जब प्रभु की प्यास लगेंगी तो टिक नहीं पओंगे,

आसू बहाओंगे, चिल्लाओंगे...सच्चे प्रेम की हमारे जीवन में बहोत ही आवश्यकता है

वो प्रभु से कहते है न के "हे प्रभु हम तो तेरे चरणों की धुल है"

ये सब कहने की बाते है, धुल है या नहीं ये हम अन्दर से अच्छी तरह से जानते है,

कहने की जरुरत ही नहीं है, और प्रभु भी जानता है की हम क्या है

झूठे प्रेम, दिखावे का प्रेम तो चल नहीं सकता,

खोटा सिक्का नहीं चलेंगा, चलेंगा तो सच्चा प्रेम चलेंगा,

कब तक दिखावा करेंगे, जीवन भर तो दिखावा करते रहते है,

जीवन ही उलट फेर, हेर फेर है

किसी को कुछ बोला, किसी को कुछ बोला,

अभी कुछ तो कभी कुछ,

आप जो हो वो हो, बदलते रहते है हम हर पल,

किसी के सामने कुछ, किसी के सामने कुछ.... ...........

hariommmmmmmmmmmmmm

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